शानवी गौतम द्वारा स्वीकारोक्ति
प्रभु की स्तुति हो, मेरा नाम शनवी गौतम है। गाँव तिरछा, पिंग, कुंडा, प्रतापगढ़ राज्य: उत्तर प्रदेश।
मेरे परिवार में पाँच सदस्य हैं — मेरे पापा, मम्मी, दो भाई और मैं।
मेरा परिवार मसीह में आने से पहले हिंदू था। मेरे पिता का पूरा परिवार तंत्र-मंत्र करता था और मम्मी पूजा-पाठ करती थीं।
मैं बचपन से ही बीमार थी, डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था, जिसका प्रभाव हमारे पूरे परिवार पर धीरे-धीरे पड़ने लगा और बीमारियाँ होने लगीं। दुष्ट आत्माएँ हमें सताने लगीं।
फिर किसी ने हमें यीशु मसीह के बारे में बताया और हम धीरे-धीरे मसीह में आगे बढ़ने लगे, प्रार्थना करने लगे।
मेरे चाचा के बेटे हेमंत को, जिसकी मम्मी नहीं थी, ब्लड कैंसर हो गया था। हेमंत केवल 3 महीने का था। फिर मम्मी उसे यीशु दरबार लेकर गईं और परमेश्वर ने उसे अच्छा कर दिया।
इसके बाद हमारा विश्वास प्रभु में और भी बढ़ा। जैसे-जैसे हम विश्वास और प्रार्थना में आगे बढ़ने लगे, शैतान ने और परेशान करना शुरू कर दिया।
बड़े भाई का नाम सचिन है, उसकी आँखों की पलके बंद हो गई थीं। डॉक्टर ने कहा कि ये कभी नहीं उठेंगी।
मुझे भी मिर्गी आती थी और मैं बेहोश हो जाया करती थी।
छोटे भाई का नाम अनुराग है, उसकी गर्दन जन्म से टेढ़ी थी।
खुदा ने हम तीनों को चंगा किया।
जब हम बीमारी से छुटकारा पा गए, तो घर में झगड़ा शुरू हो गया।
छोटे भाई ने बाइबल और भजन की किताब फाड़ कर जला दी।
उसने मरने के लिए छत से कूदने की कोशिश की, फाँसी लगाने की कोशिश की, 5 लीटर मिट्टी का तेल खुद पर डालकर आग लगाने की कोशिश की, लेकिन आग जली ही नहीं।
इन सब से उसे कुछ नुकसान नहीं पहुँचा।
दोनों भाई बहुत झगड़ते थे, एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू हो जाते थे।
मेरे पापा भी झगड़ने लगे।
बीमारियाँ तो खत्म हो गईं, पर झगड़े बढ़ते ही गए।
जब २०२0 में हम Persecution Relief की मीटिंग से जुड़े, तब पापा का झगड़ा बंद हो गया और वे यीशु मसीह के अधीन हो गए।
लेकिन भाई आपस में झगड़ते रहे।
फिर २०२२ में Persecution Relief ने प्रार्थना की, और झगड़ा बंद हो गया।
२०२२ में छोटा भाई देहरादून पढ़ने गया, पर पैसे नहीं थे।
मम्मी-पापा का विश्वास था कि वे अपने बेटे को क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाएँगे और किस्त लेकर फीस भरी।
मैं २०२१ इलाहाबाद के सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान विश्वविद्यालय में पढ़ने आई।
शुरुआत में मैंने बैचलर ऑफ डिविनिटी किया — यह एक थियोलॉजी कॉलेज था।
यहाँ सीनियर छात्र जूनियरों को बहुत सताते थे, मुझे भी कई बार टॉर्चर किया गया।
मैं एक गाँव की लड़की थी, जो लोगों से बात करने में डरती थी।
एक रात के 1 बजे
बजे मैंने खुदा से प्रार्थना की — “यहाँ तो सब क्रिश्चियन हैं, फिर क्यों सताते हैं?”
तब खुदा ने मुझे स्वर्ग और नर्क दिखाया।
जो सता रहे थे, वे नर्क में जा रहे थे, और जो यीशु मसीह के नाम पर सताए गए, वे स्वर्ग में जा रहे थे।
करीब १० मिनट तक मुझे लगा कि मैं शरीर में नहीं हूँ। १० मिनट बाद जब होश आया, तो बहुत डर लगा।
मैं हॉस्टल में थी। मम्मी को कॉल की — उन्होंने प्रार्थना करके कहा: “सो जाओ।”
मैंने रूममेट को भी उठाया, लेकिन वो नहीं उठी।
फिर मैंने दोबारा प्रार्थना की — तब मैंने एक बगीचा देखा।
उस बगीचे में यीशु मसीह प्रार्थना कर रहे थे।
एक तरफ पैसे थे, दूसरी तरफ यीशु मसीह।
मुझे इनमें से एक चुनना था।
मैंने यीशु मसीह को चुना।
फिर यीशु मसीह के साथ प्रार्थना की।
मेरे अंदर का डर खत्म हो गया और मैं गहरी नींद में सो गई।
बैचलर ऑफ डिविनिटी 3 साल का था — वो पूरा हो गया।
अब मैं मास्टर ऑफ सोशल वर्क कर रही हूँ।
खुदा की दया से मैंने फर्स्ट सेमेस्टर में टॉप किया है।
सेकंड सेमेस्टर के एग्जाम हो चुके हैं, रिजल्ट अभी नहीं आया है।
मेरे परिवार को यीशु मसीह में विश्वास करने के कारण कई प्रकार के सतावों का सामना करना पड़ा।
मेरे मम्मी-पापा पर झूठे केस दर्ज किए गए।
दोनों भाइयों पर भी मुकदमे हुए।
पापा को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
हमारे चर्च में लगभग 300 लोग प्रार्थना सभा में आते थे, लेकिन उसे भी बंद करवा दिया गया।
अब कुछ ही लोग आते हैं।
हमारे खेतों में जो फसल उगी थी, उसे गाँववालों ने जानबूझकर जानवरों से चरवा दिया, जिससे हमें भारी नुकसान हुआ।
इन सभी घटनाओं से मेरे परिवार और मुझे मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
इन सतावों का असर मेरी पढ़ाई पर भी पड़ा।
मैं समय पर फीस जमा नहीं कर पाती थी, जिससे कई बार शैक्षणिक गतिविधियाँ बाधित हुईं और आर्थिक बोझ भी बढ़ा।
सताव और आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई जारी रखना मेरे लिए बहुत कठिन हो गया था।
पर इस सताव में भी हम सब आनंदित हैं।
इन कठिन परिस्थितियों में Persecution Relief से मुझे बहुत सहायता मिली।
Persecution Relief ने मेरी पढ़ाई में सहयोग किया और मेरे परिवार की आर्थिक रूप से मदद भी की।
इस सहायता ने मुझे हिम्मत दी कि मैं अपने जीवन और पढ़ाई को फिर से आगे बढ़ा सकी।
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