मोहानलालगंज इलाके के बक्तौरी खेड़ा और अन्य गांवों में बड़ी संख्या में हिंदुओं के धर्मांतरण के मामले में खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस जांच कर रही है और कई संदिग्धों की पहचान हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदू दलित समुदाय को बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा।
मोहानलालगंज इलाके में बक्तौरी खेड़ा, ज्योतिनगर, फुलवरिया समेत अन्य गांवों हुए बड़ी संख्या में हिंदुओं के धर्मांतरण के बाद अब खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं। अफसरों ने गांव से इनपुट जुटाया और इस संबंध में पुलिस से भी संपर्क किया। तफ्तीश में कई अन्य लोगों के भी नाम सामने आए हैं। वह पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस अब उनके खिलाफ साक्ष्य संकलन कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों को गांवों में चल रही गतिविधियों का जाएजा लिया। एजेंसियों के अफसरों को गांव में चल रहीं गतिविधियां सामान्य नहीं लगीं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदू दलित समुदाय को बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा।
इतना ही नहीं, उत्तर-पूर्व भारत, दक्षिण भारत, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों को लाकर गाँवों में बसाया गया है। इनमें से अधिकांश लोग ईसाई धर्म को मानने वाले बताए जा रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस भी हरकत में आ गई है। मोहनलालगंज क्षेत्र के बख्तौरीखेड़ा गांव में हुए धर्मांतरण के मामले में एसीपी मोहनलालगंज रजनीश वर्मा की निगरानी में पुलिस टीम जांच कर रही है। जांच के दौरान धर्मांतरण से जुड़े कई पुख्ता सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। कई संदिग्ध पुलिस की रडार पर हैं। मलखान के व्हाट्सऐप ग्रुप से मिलीं अहम जानकारियां धर्मांतरण मामले में जेल भेजे गए मलखान के पास से मिले मोबाइल के व्हाट्सएप नंबर पर पुलिस को कई अहम साक्ष्य मिले हैं। उसके आधार पर कई संदिग्ध पुलिस के निशाने पर हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ पूरे नेटवर्क की तह तक पहुँचने के लिए जांच का दायरा और तेज कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह केवल एक गाँव तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि आसपास के अन्य गाँवों में भी इसी तरह की गतिविधियाँ सामने आई हैं। प्रशासन अब इन सभी क्षेत्रों में सतर्क निगरानी कर रहा है। धर्मांतरण न करने पर 125 हिंदू कुष्ठ रोगियों को निकाला गया था — सेंटर से ज्योतिनगर स्थित लेप्रोसी मिशनरीज सेंटर में रहने वाले करीब 125 कुष्ठ रोगियों को वर्ष 1985 में इसलिए बाहर निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने ईसाई धर्म अपनाने और उसकी परंपराओं का पालन करने से इंकार कर दिया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मिशनरीज संस्था द्वारा लंबे समय तक धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता रहा, और विरोध करने पर उन्हें पुलिस की मदद से रातोंरात आश्रम से निकाल दिया गया। मदन मोहन मालवीय मिशन बना सहारा — इन मुश्किल हालात में मदन मोहन मालवीय मिशन के लोगों ने कुछ पीड़ितों की मदद की। कुछ दिनों तक उन्हें लखनऊ में रखा गया और जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। इसके बाद मोहनलालगंज के विंदुआ क्षेत्र में खाली सरकारी जमीन पर उन्हें अस्थाई रूप से बसाया गया। यहीं से ‘सेवा समर्पण संस्थान’ का गठन हुआ, जो आज भी इन कुष्ठ रोगियों के जीवनयापन की व्यवस्था देखता है।
Source: Live Hindustan (Hindustan Media Ventures Ltd.)
DISCLAIMER:
Persecution Relief wishes to withhold personal information to protect the victims of Christian Persecution, hence names and places have been changed. Please know that the content and the presentation of views are the personal opinion of the persons involved and do not reflect those of Persecution Relief. Persecution Relief assumes no responsibility or liability for the same. All Media Articles posted on our website, are not edited by Persecution Relief and is reproduced as generated on the respective website. The views expressed are the Authors/Websites own. If you wish to acquire more information, please email us at: persecutionrelief@gmail.com or reach us on WhatsApp: +91 9993200020