पक्षपात एवम मनगढ़ंत गलत आरोपों में पास्टर को गिरफ्तार किया गया

 

दो प्रकार के सताने वाले कट्टरपंथी हैं: वे जो ज्योंति के पुत्र हैं, लेकिन धर्मी को छल और अज्ञान से सताते हैं; और जो अंधकार के पुत्र हैं जो सच्चाई जानते हैं लेकिन इसे अस्वीकार कर देते हैं क्योंकि वे सत्य को दिखा नहीं सकते। पहली श्रेणी, जब सच कहा या सिखाया जाता है, तो वे जल्द ही विचार करते हैं या बाद में इसका ध्यान रखते हैं। लेकिन दूसरी श्रेणी सत्य की आवाज को कभी भी नहीं सुन पायेंगे। क्योंकि उनके दिमाग में प्रवेश करने के लिए कोई स्थान नहीं है, अंधकार की आत्मा में समा जाने के लिए प्रकाश की तरंग के लिए कोई स्थान नहीं है।

हां, यहां तक कि वकील, जो न्याय का हिफाजत करने वाले हैं और सच्चाई को सामने लाने वाले हैं, उन्हें भी हम कट्टरपंथी सताने वालों की दूसरी श्रेणी में पा सकते हैं, जो अंधकार के पुत्र हैं। इससे हमें पता चलता है कि हमारी बाहरी रुपरेखा से कोई फर्क नहीं पड़ता, हम अपनी आत्मा की स्वभाव और अपनी आत्मा के दिल के अनुसार व्यवहार करने के लिए प्रेरित होते हैं। एक वकील जो अंधकार का है, न्याय को भ्रष्ट करेगा, एक वकील जो प्रकाश का है वह इसे आगे लायेगा।
यह ठीक वैसा ही है जैसा भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिले के एक गाँव में पिछले 15 वर्षों से यीशु मसीह की सेवा करने वाले अविवाहित पास्टर दिनेश की कहानी में है। वह एक विश्वासी के घर पर एक गृह कलीसिया चलाते है। पास्टर दिनेश सेवाकाई के लिए अपने मार्ग में थे, तब उनका सामना एक कट्टरपंथी से हुआ, जो पेशे से एक वकील है और वह वकील, जैसा कि अन्य कट्टरपंथी की नाई, धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए कहता है, “आप लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर रहे हैं। तुम क्या करते हो??”। “मैंने कहा कि मैं यीशु का प्रेम को बाँटता हूं और सिर्फ उन लोगों से मुलाकात करता हूं जो मुझे फोन करके बुलाते हैं और मैं बीमारों के लिए प्रार्थना करता हूं और लोगों से दुष्टात्मा को निकालता हूं” पास्टर दिनेश ने इस प्रकार जवाब दिये “और कुछ तर्कों के बाद उसने मुझे गाली देना शुरू कर दिया और उसने पुलिस को फोन किया और सूचित किया कि मैं लोगों को धर्मांतरण कर रहा हूँ।
मेरे खिलाफ पुलिस स्टेशन में एक झूठी शिकायत दर्ज की गई । ”पास्टर दिनेश ने प्रेसिक्युशन रिलीफ को सूचना दी।

यहाँ हम स्पष्ट रूप से देखते हैं, हालाँकि इस कट्टरपंथी “वकील” को यह जानने की उत्सुकता थी कि पास्टर अपनी सभाओं में क्या करता है, वह पास्टर के जवाब को स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं था, पास्टर के कार्यों की धार्मिकता/अच्छाइयों से उसे कोई मतलब नहीं था। इस कट्टरपंथी “वकील” के पास पहले से ही उसका अपना जवाब था, उसका अपना मनगढ़ंत, कि मसीही पास्टर लोग ” धर्मांतरण” के लिए जाते हैं और वे अपने मनगढ़ंत पे डटें रहते हैं, इससे कोई मतलब नहीं है की उसके लिए कोई खास कारण है या नहीं। वे यह स्वीकार करने से इंकार करते हैं कि धर्मांतरण स्वेच्छा से होता है, आखिरकार वे यह भी जानते हैं कि मसीहीयों को कभी भी किसी से भी धर्मांतरण करने के लिए कहने की आवश्यकता नहीं है – वे सिर्फ यह आरोप लगाते हैं– “जबरन धर्मांतरण करने” के बारे में भूल जाइये ! –, वे इसे ऐसे ही मना करते हैं।

आखिरकार, वे जानते हैं कि किसी को भी अधिकार है कि वह अपनी-अपनी आस्था का चुनाव करे, वे इसे ऐसे ही इनकार कर देते हैं एवं यदि कोई अन्य आस्था का चुनाव करता है उसे सतायेगा। और जो की वे सताए जाने का कोई कारण नहीं पाएंगे, वे धर्मी को दोषी ठहराने और निंदा करने के लिए एक कारण का आविष्कार करेंगे !! हां, क्योंकि उनके तरीके अंधकार के तरीके हैं, वे खुद को झूठ और उस अधिकार का दुरुपयोग करने की अनुमति देते हैं जो उनके पास है। पास्टर दिनेश ने बताया, “मेरे खिलाफ एक झूठा मामला दर्ज किया गया और मुझे पुलिस थाने ले जाया गया और उन लोगों ने मुझ पर कट्टरपंथियों के घर से मूर्ति चोरी करने का तथा उसे अपने कुआँ में फेकने का आरोप लगाया, जो कि मेरा पड़ोसी है।”

पास्टर दिनेश को बाद में सब अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) न्यायालय से जमानत पर रिहा कर दिया गया। यह कहानी केवल एक घटना नहीं है, यह हर उस मसीही की वास्तविकता है, जिसने अपना जीवन परमेंश्वर के कार्यों को करने के लिए दिया है, उनमें से कोई भी सुरक्षित नहीं है, और उन सभी को उन सारे कट्टरपंथियों के उसी मनगढ़ंत रणनीतियों के परिणामों का सामना करना पड़ता है । उनमें से सैकड़ों को आसानी से झूठे आरोपों के तहत पुलिस थाने में ले जाया जाता है, और या तो हिरासत में रखा जाता है या जमानत पर रिहा किया जाता है। पुलिस और सरकार समान रूप से इन रणनीति के बारे में जानते हैं, लेकिन फिर भी कट्टरपंथियों का अनुपालन करते हैं, क्योंकि वे धार्मिक रूप से कट्टर भी हैं और यह अनुमति नहीं देना चाहते हैं कि कोई भी हिंदू यीशु को अपने प्रभु और उद्धारकर्ता के रूप में अपना ले।

परन्तु बाइबिल हमे बताती है की “दुष्ट जन बुरे लोगों के जाल की अभिलाषा करते हैं, परन्तु धर्मियों की जड़ हरी भरी रहती है” नीतिवचन 12:12 । यहोवा दुष्ट के मार्गों को जानता है, एवं उसके परिणामों का चेतावनी भी देता है: “क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग करके, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है।” – इब्रानियों 4:12। “जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है। ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार का बोलना तलवार की नाईं चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं। सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है। बुरी युक्ति करने वालों के मन में छल रहता है, परन्तु मेल की युक्ति करने वालों को आनन्द होता है। धर्मी को हानि नहीं होती है, परन्तु दुष्ट लोग सारी विपत्ति में डूब जाते हैं। झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है” नीतिवचन 12:17-22। यह केवल कुछ समय पहले की बात है जब परमेश्वर ने अपना फैसला सुनाया: “और उस ने प्रधानताओं और अधिक्कारों को अपने ऊपर से उतार कर उन का खुल्लमखुल्ला तमाशा बनाया और क्रूस के कारण उन पर जय-जय-कार की ध्वनि सुनाई॥” कुलुस्सियों 2:15

प्रार्थना करें कि परमेंश्वर के हमारे समर्पित धर्मी विश्वासयोग्य सेवक इन विरोधों से हतोत्साहित न हों एवं उनके बड़े दुःख में उनकी उन्नति के लिए परमेंश्वर की संतान पे निरंतर आशीष बनी रहे । “और पृथ्वी की सारी जातियां अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगी: क्योंकि तू ने मेरी बात मानी है।” – उत्पत्ति 22:18

प्रार्थना करें कि परमेंश्वर जल्द ही धोखेबाज कट्टरपंथियों पर अनुग्रह और दया दिखाए और उन्हें सच्चाई में लाए, और वह जो दुष्टों पर अपना फैसला सुनाता है।

प्रार्थना करें कि कानूनी अधिकारी जिनके लिए सौंपे गए हैं न्याय के साथ काम करें और वे याद रखे कि उनके अधर्मी तरीकों का भी परिणाम हैं, ताकि वे प्रभु के भय में चलना शुरू कर दें।

यीशु की शान्ति में,

उत्तर प्रदेश में 2020 की तीसरे तिमाही में 27 घृणित अपराध दर्ज किए गए, इसकी साल दर गिनती के साथ आश्चर्यचकित करने वाले 90 मामले सामने आए! ये संख्या 2017 से भारत में मसीहीयों के लिए रहने के लिए इसे सबसे खतरनाक राज्य बनाती है और किसी अन्य राज्य ने यह उपलब्धि नहीं ली है।

जनवरी 2016 से सितम्बर 2020 तक, प्रेसिक्युशन रिलीफ ने भारत में मसीहीयों के खिलाफ घृणा से सम्बंधित अपराधों के 2224 मामले दर्ज किए हैं।

अकेले 2019 में, प्रेसिक्युशन रिलीफ ने 2018 में 447 मामलों की तुलना में, 2017 में 440 मामलों और 2016 में 330 की तुलना में अधिकतम 527 मामले दर्ज किए। प्रेसिक्युशन रिलीफ ने भारत में मसीहीयों के खिलाफ घृणा से सम्बंधित अपराधों के 2067 मामले दर्ज किए हैं।
यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अपनी 2020 की रिपोर्ट में भारत को सबसे निचली रैंकिंग, कंट्रीज ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न ’(CPC) में पे लुढका दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इराक और अफगानिस्तान के साथ “टीयर 2” में भारत में सतावट को कठोरता/क्रूरता का स्थान दिया। पिछले सात वर्षों में, भारत ओपन डूअर्स की वर्ल्ड वॉच लिस्ट में सतावट की कठोरता में ईरान के ठीक पीछे रैंकिंग नंबर 31 से 10वें स्थान पर पहुंच गया है ।



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