हमें जला दो, फिर भी हम मसीह को कभी भी नहीं छोड़ेंगे , बिहार


क्या आप एक विश्वासी या मसीह के शिष्य हैं? सुनने में अजीब है! हालाँकि हम उसके प्रिय विश्वासी होने पर खुशी मनाते हैं, लेकिन क्या हम वाकई उसके अनमोल चेले होने का दावा कर सकते हैं? आइए पवित्रशास्त्र के वचनों पर एक गहरी नज़र डालें, मती 16:24-25 तब यीशु ने अपने चेलों से कहा; यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा।

यीशु के पीछे हो लेने के लिए आप क्या कीमत चुकाने को तैयार हैं? क्या आप यीशु के पीछे हो लेने के लिए अपना जीवन खोने को तैयार हैं? जब तक हम असाधारण चुनौतियों, कष्टों, परीक्षणों का सामना करते हैं, तब तक उत्तर देने के लिए कठिन प्रश्न, और हमारे विश्वास के कारण सतावट हो सकता है।

हो सकता है कि बिहार के मधुबनी जिले के बरदाहा से पास्टर बैजू पासवान की कथा हमें यह जाँचने की अनुमति दे कि मसीह का शिष्य होने का मतलब क्या है। जब प्रेसिक्युशन रिलीफ पास्टर बैजू के पास पहुंचा, तो वह इतनी विनम्रता से बात कर रहे थे कि उनके आवाज को बड़ी ध्यान देकर सुनना पड़ता था। जब उनसे कहा गया कि क्या वह थोड़ा जोर से बोल सकते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “अगर मैं इससे ज्यादा जोर से बोलूंगा, तो वे आएंगे और फिर से मेरे साथ मारपीट करेंगे।

मैं चारों तरफ सतावट से घिरा हुआ हूं।”
पास्टर बैजू ने वर्ष 2009 में यीशु को अपने प्रभु और उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया। इन विश्वास से भरकर 11 वर्षों में, उन्होंने 2017 तक राजस्थान में प्रभु की सेवा की, 2018 में बरदाहा में अपने पैतृक गाँव वापस लौटे। उन्हें अच्छी तरह से पता था कि वह अपने विश्वास को लेकर अपने गाँव में स्वीकार नहीं किया जायेंगे और उन्होंने उसी दिन से घृणा का सामना करने लगा जब से वह बारदाहा वापस आया थे।

गोमांस या सूअर का मांस खाने का आरोप लगाने से लेकर उसे तांत्रिक कहलाने और मन को वश में करनेवाले जादूगर जैसे नाना प्रकार की गालियां देते हुए धमकी दी जाती है और जान से मारने की एवं जला देने की भी चेतावनी दी जाती है, पास्टर बैजू और उनके परिवार को यह सब सहना पड़ा। सभी बाधाओं के बावजूद, उनके परिवार ने परमेंश्वर की आराधना एवम सेवा करना जारी रखे।

इस परिवार का ऐसा विश्वास है, कि गावँ के साथियों का अपमान और घृणा के बीच, उन्होंने अपने बड़े बेटे को परमेश्वर के वचन का अध्ययन करने तथा पूर्णकालिक सेवा करने के लिए चुने हैं ।
लॉकडाउन चरण के दौरान, पास्टर बैजू ने फोन के माध्यम से अपनी सेवाकाई को जारी रखा, और जब ग्रामीणों ने उन्हें फोन पर प्रार्थना करते देखा, तो उन्होंने उन पर नाजायज संबंधों का आरोप लगा दिया। जैसे कि ग्रामीण लोग सिर्फ घृणा से ही भरे हुए ही नहीं थे बल्कि, उन लोगों ने इनके 10 साल के बेटे की बेरहमी से पिटाई की और उसके पैरों को घायल कर दिया।

पास्टर बैजू मती 5:11 में वर्णित आशीष वचन का चित्रण करते हैं
“धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।” वे और उनके परिवार इन सभी कष्टों से गुजरे, फिर भी उन्होंने कभी अपने विश्वास से पीछे नहीं हटे। पास्टर बैजू भी अपने दुख में परमेंश्वर की महिमा करते है।

वह कहते है, “परमेंश्वर अनुग्रहकारी है, वह मेरी उन सभी आवश्यकताओं को उपलब्ध कराता है जो मैं और मेरे परिवार को जीवन यापन के लिए करना पड़ता हैं। रात्रि के समय में, हम एक परिवार के रूप में इकट्ठा होते हैं और 9 अन्य गांवों के विश्वाससी जन मेरे साथ जुड़ते हैं, ताकि हम परमेंश्वर की प्रशंसा करें। ” क्या यह शानदार नहीं है, जो हमें रोमियों 12:12 में याद दिलाता है, “आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।”
पादरी बैजू को गलत शिक्षाओं के आरोप में बुरी तरह से निंदा किया गया। ग्रामीणों ने धोखाधड़ी किया है और उन्होंने उसके और उसके परिवार की ऑडियो रिकॉर्डिंग में हेरफेर किया। 26 सितंबर, 2020 को पास्टर बैजू और उनके परिवार, 3 लड़कों, एक बेटी और उसकी पत्नी को गांव के सरपंच समिति को सौंप दिया गया ताकि उन्हें सजा भुगतने की जरूरत हो। उन्होंने विनती की और कहानी का अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अनुरोध किया, लेकिन उनपे कोई दया नहीं दिखाई गई।

फैसला यह लिया गया कि पास्टर बैजू को मसीह को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होने पर जुर्माना के रूप में 5000 रुपये का भुगतान करना होगा, जब उसने कहा कि हमारे पास भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं, तो उनलोगों ने कहा कि तुमको सरपंच समिति के सामने 50 जूते खाने होंगे । बाद में, उनके बेटे को ही 10 जूते मारने के लिए मजबूर किया गया ।

एक बार जब यह सिलसिला खत्म हो गया, तो पास्टर बैजू ने निडरता के साथ बुलंद आवाज से बोला कि गावं के लोग जो कुछ भी करें, यीशु मसीह हमें त्यागने वाले नहीं हैं और हमे हमारे सभी विपत्तियों से बचाएंगे। यह सुनकर गाँव वाले और सरपंच सहम गए और उन्होंने उसे और उसके बड़े बेटे को तब तक पीटना शुरू किया जब तक कि वे जमीन पर गिर नहीं गए। जब उनकी पत्नी मदद के लिए दौड़ी, तो उसके पेट पर मुक्के मारे गए।

पादरी बैजू की पत्नी हाल ही में एक सर्जरी के माध्यम से गुजरी थी, और झटका/चोट खाने के वजह से लगातार उल्टी होने लगी और खाने पिने से मन हटने लगा। उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके सर्जिकल चीरों में सूजन है। वह अब वापस घर लौटने की कोशिश कर रही है, चंगी होने की उम्मीद कर रही है |

पास्टर बैजू और उनके परिवार को “हल्लिलूय्याह” को जोर से कहने के लिए एवं परमेंश्वर की प्रशंसा करने का आरोप लगाते हुए, जलाए जाने की धमकियां मिलती रहती हैं, और लगातार पुलिस को कुछ भी रिपोर्ट न करने की चेतावनी दी जाती है की वे लोग किसी भी मदद के लिए तैयार नहीं होंगे। प्रेसिक्युशन रिलीफ अब सक्रिय रूप से पास्टर बैजू को प्रार्थना और अन्य साधनों के माध्यम से उसे अपने विश्वास को स्वतंत्र रूप से सक्षम करने के लिए सहयोग कर रहा है।

हम आपसे पास्टर बैजू और उनके परिवार को अपनी बहुमूल्य प्रार्थनाओं में याद करने का अनुरोध करते हैं।

प्रार्थना करें कि परमेंश्वर की मजबूत मौजूदगी पास्टर बैजू और उनके परिवार के ऊपर हो।
पास्टर बैजू और उनके परिवार के शारीरिक एवम भावनात्मक चंगाई के लिए प्रार्थना करें।

प्रार्थना करें कि वे अपने विश्वास में बढ़ें और गावं के लोगों के बीच में जीवित परमेश्वर गवाह बनें।

प्रार्थना करें कि हमारे दयालु परमेंश्वर आवश्यक रूप से इन धार्मिक कट्टरपंथियों के दिलों और जीवन में दिखाई दे, उन्हें उनके पापों को माफ करते हुए उन्हें अंधकार के बंधन से मुक्त करें।

प्रार्थना करें कि बिहार राज्य में रहने वाली प्रत्येक आत्मा को

परमेंश्वर का प्रेम और क्षमा के साथ सामंजस्य हो जाये।
हम एक बहुत अच्छे परमेंश्वर की सेवा करते हैं, और हमें आश्वासन दिया जाता है कि वह हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है और उम्मीद से बढकर उन सभी का जवाब देगा। जैसा कि आप प्रार्थना करते हैं, रोमियों 8:31 में लिखे गए परमेश्वर के शक्तिशाली वचन पर मनन करें, “सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?”
जनवरी 2016 से सितम्बर 2020 तक, प्रेसिक्युशन रिलीफ ने

भारत में मसीहीयों के खिलाफ घृणा से सम्बंधित अपराधों के 2224 मामले दर्ज किए हैं।

अकेले 2019 में, प्रेसिक्युशन रिलीफ ने 2018 में 447 मामलों की तुलना में, 2017 में 440 मामलों और 2016 में 330 की तुलना में अधिकतम 527 मामले दर्ज किए। प्रेसिक्युशन रिलीफ ने भारत में मसीहीयों के खिलाफ घृणा से सम्बंधित अपराधों के 2067 मामले दर्ज किए हैं।

यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अपनी 2020 की रिपोर्ट में भारत को सबसे निचली रैंकिंग, कंट्रीज ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न ’(CPC) में पे लुढका दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इराक और अफगानिस्तान के साथ “टीयर 2” में भारत में सतावट को कठोरता/क्रूरता का स्थान दिया। पिछले सात वर्षों में, भारत ओपन डूअर्स की वर्ल्ड वॉच लिस्ट में सतावट की कठोरता में ईरान के ठीक पीछे रैंकिंग नंबर 31 से 10वें स्थान पर पहुंच गया है ।



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