वापिस नही लौटूंगा, भलें ही हमे जान ही देना पड़ जायेंः ओडिशा

हमारा देश पिछड़ें कुंठित धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहा है, जो अब एक गृहयुद्ध का स्तर का रूप ले लिया है और यह युद्ध पहिचान पे, नाम पे आधारित हैं । बार-बार मसीही परिवारों को मसीह में उनकी पहचान के लिये परेशान किया जा रहा हैं ।

07 अक्टूबर 2020 को, एक ही गाॅंव के सदस्यों सहित धार्मिक उग्रपंथयों का एक समूह ने भारत के ओडिशा राज्य में झारसुगुड़ा जिले के अंतर्गत एक गाॅंव हीरमा में 07 से अधिक मसीही घरों पर हमला किया । मसीही परिवारों को घसीट कर बाहर लाया गया और इन उग्रपंथीयों द्वारा पीटा गया, एवं यहाॅं तक कि महिलाओं एवं बच्चों को भी नही छोड़ा ।

वे लोग 30 से भी अधिक मसीही परिवारों को घर वापसी (मूल विश्वास की ओर मुड़ना) करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं । जबकि इन परिवारों ने स्वेच्छा से मसीह का चुनाव किये हैं एवं समर्पित होकर खुशी से प्रभु यीशु की आत्मा मे आनंदित हो रहे हैं, जिसने उनके दिलों को परिपुर्ण किया हैं, ये कट्टरपंथी उनलोगों को हिन्दु धर्म मे वापिस लौटने के दबाब देना चाहते हैं । जबकि ये कट्टरपंथी मसीहीयों पर जबरन धर्मान्तरण का आरोप लगाते हैं, वे इस बात से बेखबर दिखते हैं कि वे वही हैं जो उन्हें पुराने विश्वास की ओर वापिस ले जाने के लिये मजबूर कर रहे हैं ।

‘‘हीरमा गाॅंव मे 30 से अधिक मसीही परिवार हैं एवं कट्टरपंथी प्रत्येक परिवार को परेशान कर रहे हैं’’ यह बात जीवन मार्ग से स्थानीय पास्टर समालुगुन ने बताये हैं ।

‘‘उनकी मांग हैं कि हमें मसीह को एवं मसीही विश्वास को छोड़ देना चाहिये अन्यथा हम आपलोगों को उसी बिंदु पर परेशान करते रहेगें जहाॅं आपलोगों को गाॅंव छोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नही बचेगा ।

पास्टर समल ने आगे बतायें कि यदि हम मसीह को छोड़ देते हैं’’ तभी ही इस गाॅंव मे रहने की अनुमति दी जायेगाी ।
सुनील मुंडा, जो विश्वासियों में से एक थे, उन्हें घसीट कर बाहर निकाला गया एवं उनकी बहनों जस्पीनकिसन तथा मसीचरण गुड़िया ने बहादुरी से 04 विषयों को स्पष्ट की:
1. सभी हमारे मसीही भाई हिन्दु धर्म मे पुनः वापिस नही आना चाहते हैं ।
2. जैसा कि अब लाॅकडाउन नही ज्यादा नही है, हमलोग बिना किसी बाधा के प्रभु यीशु मसीह की आराधना करना चाहते हैं ।
3. कुछ विवाह होने हैं एवं हम कट्टरपंथीयों के द्वारा किसी भी तरह का गड़बड़ी नही चाहते हैं ।
4. हमें स्थानीय अधिकारियों से उचित अनुमति एवं आश्वासन की जरूरत हैं ताकि आने वाले दिनों में हमारी आराधना सेवा का संचालन हो । यह हमारा मूलभूत सवैंधानिक अधिकार हैं ।
‘‘हमारे सभी विश्वासी इस भीषण हमले के बाद भी विश्वास में मजबूत हैं, उनका विश्वास यीशु में कभी भी फीका नही पड़ा । वे प्रभु और उनके बुद्धि पर भरोसा करते हैं ।

यहाॅं तक कि अगर हमें अत्यधिक सतावट का सामना करना पड़ता है एवं सबकुछ खो देते हैं तो पर भी एक परिवार के रूप में हमने निर्णय लिये है कि वापस नही लौंटेगे’’ जैसा कि पास्टर समल ने बहादुरी से यकीन दिलाया । उन्होनें आगे बतायें कि भय दिखाई देता है परन्तु पवित्र आत्मा की सामथर््य से हम सह लेगें एवं उसके अगुवाई के पिछे चलेगें ।

एक निर्दयी, अराजक, असंगत अपरिपक्व असभ्य व्यवहार, ईश्वर का कैसे हो सकता है? लेकिन बाईबिल हमें सिखाती हैं कि प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है, यह डाह नही करता, एवं अपनी बड़ाई नही करता, और फूलता नहीं । वह अनरीति नहीं चलता, प्रेम अपनी भलाई नहीं चाहत, झंुझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता, कुकर्म से आनंन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता हैं । प्रेम सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता हैं ।

आईयें प्रार्थना करें कि कट्टरपंथी प्रेम की उत्तमता को सिखे, क्योकि प्रेम परमेश्वर का सार है, प्रेम ही परमेश्वर हैं, प्रेम परमेश्वर का आत्मा है, जबकि हिंसा शैतान का हैं ।

मसीह के रूप मे हम जानते हैं कि सतावट आत्मा से भरे हुए नया जन्म पाये हूए मसीह का निकल जाने वाला कोई किस्मत नही हैं । ‘‘पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताये जायेगें’’- 2 तिमूथी 3ः12

‘‘क्योंकि प्रभु जिससे प्रेम करता है, उसको ताड़ना भी करता है, और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है’’- इब्रानियों 12ः6 । हम जानते हैं कि कष्ट आत्मिक धन को खरिदने के लिये एक मुद्रा है, जितना अधिक कष्ट, उतना ही अधिक हम महिमा के आयाम के करीब जाते हैं जो हमारे प्रभु यीशु ने अतुलनीय दर्द के माध्यम से खुद को जाना है ।

‘‘कि इस समय के दुःख और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रकट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं ।’’- रोमियों 8ः18
और हम सभी लोग एक होकर, यीशु के दिल मे एकजुट होकर, हम एक दुसरे की देखभाल करते रहेंगे तथा सतावट के मध्य एक दूसरे की रक्षा करेगें ।

आइये प्रार्थना करें कि पुलिस एवं अधिकारी गण अपने कट्टरपंथीयें को याद दिलायें कि हमारा देश इसके नागरिकों के लिये है न कि केवल हिंदुओं के लिये है, एवं वे अपने कट्टरपंथीयों को सीमाओं को याद दिलायें क्योकिं यह प्रत्येक नागरिक का बुनियादी स्पष्ट नियम हैं कि दूसरों की स्वतंत्रता का हनन न करें, थोड़ी सी भी हिंसा न हो ।
आइयें प्रार्थना करें कि कट्टरपंथी इस बात को समझ सके कि हिंसा किसी के मन को नही बदल सकता हैं एवं क्योकि वे निम्न स्तर की समझ एवं सभ्यता मे अपने आपको तैयार करते हैं ।

आइयें प्रार्थना करें कि वे समझ सके कि हिंसा शरीर का शरीर से अलग करने का निम्न स्तर हैं ।

आइये प्रार्थना करें कि वे किसी के मूल अधिकार का सम्मान करें जो वह चाहता है एवं साथ साथ आराधना के लिये किसी को आमंत्रित करने का अधिकार हो ।

‘‘घर वापसी करने के लिये पीटाई’’ करते समय उनके मन मे ‘‘मजबुर करने’’ के लिये ‘‘आमत्रिंत करने’’ के कैसे स्विकार किया जा सकता है?

आइयें प्रार्थना करें कि हमारे मसीह यीशु का स्थिर प्रेम अनुग्रह द्वारा उनके दिलों पे कब्जा करें ताकि वे दोषी ठहराया जायें एवं बदल जायें तथा परिपुर्ण हो जायें ।
हमारे मसीहीयों को विश्वास की परीक्षा मे सफल होने के लिये

आइयें प्रार्थना करें, परमेश्वर का आत्मा का धैर्य का गुण का उपयोग करते हुए वे शक्तिहीन नही होगें और नाही समझौता करेगें ।
आइये खोये हुए लोगों के उद्धार के लिये प्रार्थना करें, कि वे परमेश्वर का प्रेम को चखे एवं उसमें बने रहे एवं समझे क परमेश्वर का संतान क्या होता है ।

आइये प्रार्थना करें कि प्रभु के प्रेम की समानत उनके पिता और हमारे लिये हो, इसलिए हम अपने प्रभु एवं अपने भाइयों के लिए एक स्थिर प्रेम रखते हैं ।

हमारे मसीह के नाई प्रेम के कारण हर कोई पहचान लेगा कि हम मसीह ही हैं ।



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