वह अभी भी अपनी कलीसिया की प्रार्थनाओं का उत्तर देता है! उत्तर प्रदेश

“फिर में तुम से कहता हूँ, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिए जिसे वे मांगें, एक मन के हों, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्वर्ग में है उस के लिए हो जाएगी। क्योंकि जहाँ दो या तीन मेरे नाम से इकट्ठे होते हैं, वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ।” मत्ती 18:19-20

पवित्र बाइबल से एक उत्कृष्ट पद है जो प्रार्थना में सहमति की सामर्थ को प्रकट करता है। यीशु हमें बताता है कि जब उसकी संतानें उसके नाम में इकट्ठी होती हैं और एक दूसरे के साथ सहमति में प्रार्थना करती हैं, तो वहाँ किसी भी विषय के सम्बन्ध में प्रार्थनाओं का महत्वपूर्ण छुटकारा होता है–हमारा सर्वउपस्थित परमेश्वर कितना प्रेमी और देखभाल करनेवाला है! असल में, उसके नाम में इकट्ठा होना और उसके प्रति अपनी प्रार्थनाओं एवं याचनाओं को अर्पित करना इतना बड़ा विशेषाधिकार है। परन्तु अगर इस विशेषाधिकार पर सवाल किया जाता है और अपने सृष्टिकर्ता के प्रति परम आदर के योग्य प्रार्थनाओं के लिए आप पर दोष लगाया जाता है तो क्या होगा?

भारत में, जब आप पढ़ रहे हैं, ठीक इसी वक्त – हमारे भाइयों एवं बहनों को प्रार्थना करने और उसके नाम में इकट्ठा होने के लिए सताया जा रहा है। यह पास्टर संतोष की विस्तृत कहानी है, जो मसीह में हमारा बहुमूल्य भाई है। पास्टर संतोष उत्तर प्रदेश, भारत, में ख्रिष्तीय कलीसिया चलाते हैं जो मसीही सताव के सम्बन्ध में अत्यंत प्रभावित राज्यों में से एक है।

एक अच्छे दिन में लॉकडाउन की अवस्था के दौरान, पर्सिक्यूशन रिलीफ ने टॉल-फ्री नम्बर 1800-1234-461 पर एक फोन कॉल प्राप्त किया, जो भारत में सताए हुए मसीहियों की सेवा के लिए समर्पित है। फोन अर्पित ने किया था जो पास्टर संतोष की भतीजी हैं ।अर्पित ने पर्सिक्यूशन रिलीफ को फोन लगाया था जब स्थानीय पुलिस ने जबरन धर्मांतरण के अभियोगों के तहत पास्टर संतोष पर मामला दर्ज़ कर लिया था। पास्टर संतोष को अवसर मिला कि पर्सिक्यूशन रिलीफ से बात करे जब उसे पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा था। पास्टर संतोष महीने में एक बार अपने पुराने विश्वासी राज बहादुर के घर में इकट्ठा होते थे जो ग्राम नीमामाउ, जिला बाराबांकी, उत्तर प्रदेश से हैं। जब वे प्रार्थना कर रहे थे, तब गांव में से किसी ने पुलिस को बुला लिया और शिकायत की कि राज बहादुर के घर में धर्मांतरण चल रहा है। सुबेहा स्टेशन से पुलिस ने इस शिकायत पर तुरन्त कार्यवाही की और पास्टर संतोष को गिरफ्तार कर लिया। पास्टर संतोष के विरुद्ध धन देकर धर्मांतरण कराने के झूठे अभियोगों को दर्ज़ कर लिया गया था। उन्हें छः घण्टे तक हिरासत में रखा गया, और बाद में रहा कर दिया गया था।

पास्टर संतोष अपनी रिहाई के लिए परमेश्वर की महिमा करते हैं और धन्यवादी हृदय के साथ प्रार्थनाओं और मध्यस्थता की विनतियों की सामर्थ को स्वीकार करते हैं जिन्हें उनकी कलीसिया के विश्वासियों और पर्सिक्यूशन रिलीफ टीम के द्वारा ऊंचा उठाया गया था। वे हाल ही में पर्सिक्यूशन रिलीफ की ऑनलाइन रविवारीय आराधना में शामिल हुए हैं और उन्हें सारे भारत में सताए हुए मसीहियों की उत्साहित करनेवाली गवाहियों के द्वारा बलवंत किया गया और दिलासा दिया गया था।

कलीसिया के द्वारा की गई सच्ची प्रार्थनाओं के उत्तर के रूप में पास्टर संतोष की रिहाई हमें पतरस की जांच के एक दिन पहले ही जेल से उसकी रिहाई में ईश्वरीय हस्तक्षेप का स्मरण दिलाती है। “सो बन्दीगृह में पतरस की रखवाली हो रही थी; परन्तु कलीसिया उसके लिए लौ लगाकर प्रार्थना कर रही थी।” प्रेरितों के काम 12:5 । सचमुच में प्रार्थना में बहुत सामर्थ होती है। जब उसकी संतानें किसी विषय के लिए एक स्वर में अपनी आवाज़ों को उठाती हैं, तो हमारा परमेश्वर अपने बहुतायत के प्रेम में हमारी सभी प्रार्थनाओं का उत्तर देता है। पास्टर संतोष की रिहाई इसकी एक गवाही है।

सताए हुए भाइयों और बहनों की बहुत सी अनसुनी और अनकही विस्तृत कहानियां हैं, जिन पर सच्चे परमेश्वर की सेवा करने के लिए गलत रीति से दोष लगाया गया था।

हम आपसे विनती करते हैं कि निम्नलिखित प्रार्थना बिन्दुओं के लिए अपनी आवाज़ों को उठाइए:

• पास्टर संतोष और उसके परिवार की सुरक्षा और शांति के लिए प्रार्थना कीजिये

• पास्टर संतोष की कलीसिया को बढ़ने हेतू समर्थ करने के लिए हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की निरन्तर विश्वासयोग्यता के लिए प्रार्थना कीजिये और उद्धार न पाये हुए अनेक आत्माओं के लिए प्रार्थना कीजिये जिससे वे उसके और उसकी कलीसिया के माध्यम से मसीह को जानने पाएं।

• ईश्वरीय यंत्र के रूप में पर्सिक्यूशन रिलीफ को बलवंत करने के लिए प्रार्थना कीजिये जिससे भारत में सताए हुओं तक पहुंचा जाए और राहत, शांति और सताये हुओं के लिए प्रार्थनाएं प्रदान की जाएं।

मसीह में प्रिय भाई एवं बहन, 2 कुरिन्थियों 10:3-4 पर मनन कीजिये, “क्योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते। क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिए परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।”

आपकी प्रार्थनाएं हमारे परमेश्वर के प्रति सुखदायक सुगंध के रूप में ऊपर उठाई जाएं और सताए हुओं के लिए आवाज़ बनें। परमेश्वर आपको आशीष दे और अपनी विश्वासयोग्यता में आपकी रक्षा करे।

2020 के पहले भाग में, पर्सिक्यूशन रिलीफ ने मसीही सताव के 293 मामलों को दर्ज़ किया था। केवल 2019 में ही, 2018 में 447 मामलों, 2017 में 440 मामलों, और 2016 में 330 मामलों की तुलना में हमने 527 मामलों की अधिकतम संख्या को दर्ज़ किया था। जनवरी 2016 से लेकर जून 2020 तक, पर्सिक्यूशन रिलीफ ने भारत में मसीहियों के विरुद्ध 2067 नफरत के अपराधों को दर्ज़ किया है।



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